#Kavita by Sunil Gupta

“ढू़ंढ ले ठोर ठिकाना”
“पत्नि के कहने पर साथी,
बेटे ने कहा-माँ से-
ढूंढ ले ठोर ठिकाना।
अब मुश्किल यहा्ँ,
संग साथ-
जीवन में निभाना।
पिता के मरने पर,
क्या-दिया था वचन-
न याद मुझे दिलाना।
जब तक न मिली थी,
दौलत मुझको-
किसी ने न तुझको सताया।
भूल जा माँ अब तू,
न बनूंगा मैं-
श्रवण कुमार तेरा।
जीवन का इतिहास ही तो,
यहाँ दोहरा रहा-
दादी के आँसू की याद दिला रहा।
पत्नि के कहने पर साथी,
बेटे ने कहा -माँ से-
ढूंढ ले ठोर ठिकाना।।”
सुनील कुमार गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published.