#Kavita By Sunil Gupta

“छोड़े न जीवन में आस”
“जीवन की हर नई सुबह,
देती यही है-आभास।
नया सबेरा ले आया,
तन-मन में नव-विश्वास।।
छटे तन मन का अंधकार,
फैले आशा का प्रकाश।
सद् -कर्मो से जीवन में हो,
फिर नव उमंगो का वास।।
दान,दया,धर्म संग ही,
बढ़ता आस्था-विश्वास।
सच होगे सपने साथी,
छोड़े न जीवन में आस।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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