#Kavita By Sunil Gupta

“अपनत्व भूल न जाना”
“छाया हो.मधुमास जीवन में,
तो भी साथी-
आपनत्व भूल न जाना।
महकते उपवन में भी,
फूलो संग साथी-
काँटो का मिलना।
ऐसे ही जीवन संबंधो को,
जीवन में साथी-
सहज हो कर निभाना।
मृदु वाणी से तुम अपने,
जीवन में साथी-
कटुता को मिटाना।
नि:स्वार्थ भाव से जग में,
भटकते संबंधो में भी-
अपनत्व की डोर बढाना।
छाया हो मधुमास जीवन में,
तो भी साथी-
अपनत्व भूल न जाना।।”

सुनील कुमार गुप्ता

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