#Kavita By Sunil gupta

“जरूरी तो नहीं”
“कथनी करनी का अंतर,
जान आओ जीवन में-
जरूरी तो नहीं।
साथी तुम साथी हो,
हर पल कहना-
जरूरी तो नहीं।
संजोए सपने जीवन में,
सभी पूरे हो साथी-
ये जरूरी तो नहीं।
सत्य -पथ चलते रहे,
साथी जग में-
मिले सम्मान जरूरी तो नहीं।
अपनो में किया विश्वास,
हो न विश्वासधात-
ये जरूरी तो नहीं।
भक्ति में डूबा जीवन,
प्रभु दर्शन दे-
ये जरूरी तो नहीं।
कथनी-करनी का अंतर,
जान जाओ जीवन में-
जरूरी तो नहीं।।”
सुनील कुमार गुप्ता

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