#Kavita by Sunil Gupta

” दीपावली”
“एक दीप जला दे साथी,
जो हर ले तम का डेरा।
दीप पर्व दीपावली फिर,
लाये खुशियों का फेरा।।
दीप से दीप जले साथी,
मिटता जग से आंधेरा।
अमावश की रात्रि में भी,
होता जीवन का सबेरा।।
भक्ति संग पूजे प्रभु को,
बने जीवन का सहारा।
नेह संग संबंधों से,
महक उठेगा घर-द्बारा।।
खुशियों के आँगन में साथी,
अपनत्व का हो बसेरा।
एक दीप जला दे साथी,
जो हर ले तम का डेरा।।”
ःःःःःःःःःःःःःःःःः
सुनील कुमार गुप्ता

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