#Kavita By Sunil Kumar gupta

“रात”
“साथी बीत गई काल- रात्रि,
नव-भोर का सूरज आएगा।
साथी भूले कटुता सारी,
जीवन में मधुमास छाएगा।।
कितनी -भी हो रात अंधेरी,
साथी एक दीपक जलाएगा।
बेचैन मन में साथी यहाँ,
फिर भोर शीतलता लाएगा।।
महक उठेगा जीवन सारा,
सभी को अपना बनाएगा।
साथी बीत गई काल रात्रि,
नव-भोर का सूरज आएगा।।
सुनील कुमार गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published.