#Kavita by Sunil Samaiya Hasya Kavi

जब नेताओं की चाल सबको लड़ाने की है तो कवियों का दायित्व है कि वो उससे अगाह करे  आइये एक रचना जो

राजनैतिक चालो का पर्दाफाश करने की कोशिश  है

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खेल आग का खेल रहे है, सारे दल मिल देश मे

सब के सब शैतान छिपे है ,साधु वाले भेष मे

 

दलित स्वर्ण अगड़ा पिछड़ा ,और संख्या बल से तौल रहे

खंड खंड करने भारत को, हर पल  कड़वा बौल रहे

 

क्या होगा जिससे वोटों का ,बड़ा जखीरा मिल जाये

भले हाथ सन जाये खून से, चेहरा अपना खिल जाये

 

तुमको यह हथियार दिया है, जाओ उनको मारो तुम

पहले वाले से पैना है, सारी कसर निकालो तुम

 

वह फूला है पर भूला है, यह सब नेता चाल है

लड़ो मरो तुम मारो काटो, नेता मालामाल है

 

सोचो हमको लड़ा भिड़ाकर, माल गप्प कर जायेगे

इनको खतरा हुआ कभी तो, यह विदेश बस जायेगे

 

हम तबाह और लूटे पिटे सा, अपना माथा ठोकेगे

अपनी करनी पर पछता कर, अपना ही सर नोचेगे

 

भावी पीढ़ी की चिंता कर ,इनको सबक सिखाओ जी

जाति पाति को छोड़ देश हित, सबसे पहले लाओ जी

 

कह दो नेताओ से जाकर ,बस विकास और काम दो

हम सब भारत वासी पहले,  प्यार का बस पैगाम दो

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कवि सुनील समैया मो.8120384261

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