#Kavita by Sunil Samaiya Hasya Kavi

चुनावी चूटकी(उनकी ऐसी तैसी)

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आओ रे खीचे टांग की उनकी ऐसी तैसी

अपनी भी है मांग की उनकी ऐसी तैसी

 

पांच साल से सीरा पी गर्रा  रहे  थे

अपन भी पी लो भांग की उनकी ऐसी तैसी

 

खून पसीना मेहनत अपनी करवाके

मारी खूब छलांग की उनकी ऐसी तैसी

 

भिखमंगा थे आज सूट मे घूम रहे

अपन है नंगे आंग की उनकी ऐसी तैसी

 

पूरा घर अब  केवल उनका नेता है

अपन है ऊट पटांग की उनकी ऐसी तैसी

 

समय “समैया” बीत गया सो बीत गया

छोड़ो रस्ता रांग की उनकी ऐसी तैसी

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कवि सुनील समैया मोबाइल नंबर 8120384261

 

 

 

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