#Kavita by Sunil Samaiya Hasya Kavi

कविता माँ के नाम ***

सुख मे दुख मे हर मौसम मे सदा रही मुस्काती माँ,

खेल जान पर दुनिया रचती उसमें ही खो जाती माँ!

 

सुबह उठी थी?कब सोई थी

बच्चो मे ही तो खोई थी,

दिनभर चक्की जैसी चलकर

बहुत थकी पर ना रोई थी,

झाड़ू ,पौछा,चौका ,चूल्हा ,कभी नही सुस्ताती माँ!

सुख मे दुख मे हर मौसम मे सदा रही मुस्काती माँ

 

बीमारी मे भी हंसती है

नटनी जैसी वो नचती है

खुद की पीर भूला बच्चों मे

जान तो हर पल ही बसती है

जादू की झप्पी देकर वो हमको रोज सुलाती माँ

सुख मे दुख मे हर मौसम मे सदा रही मुस्काती माँ

 

छाती से अमृत बरसाती

बच्चों को बलवान बनाती

रोशन करती खुद जलकर के

माँ है ऐसे दिये की बाती

भरा पेट बच्चो का उसने खुद भूखी सो जाती माँ

सुख मे दुख मे हर मौसम मे सदा रही मुस्काती माँ

 

बेबस और लाचार रही पर

कोना पकड़ा पड़ी रही घर

कभी नही धिक्कार कहाँ था

रहो सुखी कहती थी दिनभर

मेरे बच्चे सबसे अच्छे दुनिया से बतियाती माँ

सुख मे दुख मे हर मौसम मे सदा रही मुस्काती माँ

 

जन्नत है उसके पांवो मे

पले बढ़े उसकी छांवो मे

जिस दिन दुनिया से जायेगी

पल पल भटकोगे राहो मे

अंधियारे मे उजियारे मे सत पथ सदा बताती माँ

सुख मे खुद मे हर मौसम सदा रही मुस्काती माँ

खेल जान पर दुनिया रचती फिर उसमें खो जाती माँ

कवि □सुनील समैया मोबाइल नंबर 8120384261

 

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