#Kavita by Sunil Samaiya Hasya Kavi

“किसान”

¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤

जो हर पल अपनी मेहनत से  , हम सबको भोजन देता है,

वह धरती पुत्र किसान कहो, क्यूँ दुख का मारा रहता है

 

वो श्रम की बूंद बहाता है

हर मौसम को कह जाता है

मै नही थका मौसम सुन ले

बारिश गर्मी सह जाता है

 

पर भूमि पुत्र किसान कभी, हमसे बोलो क्या लेता है

जो हर पल अपनी मेहनत से,  हम सबको भोजन देता है

 

ईश्वर का दूजा रूप वो

पालन कर्ता है भूप वो

वह दीनबंधु कृपालु है

और सबसे अलग अनूप है वो

 

है खुद परमार्थ की मूरत ,नही खुद की दीनता कहता है

जो हर पल अपनी मेहनत से,  हम सबको भोजन देता है

 

कभी उसके दुख को जानो तो

उसकी पीड़ा को मानो  तो

क्यूँ फांसी पर चढ़ रहा वो

वह दुखी है यह पहचानो तो

 

दुखियारा दीन दशा वाला, सचमुच किसान अब रोता है

जो हर पल अपनी मेहनत से , हम सबको भोजन देता है

 

सब मौन है कोई नही बोला

वोटों से बस सबने तोला

ईश्वर भी सुध नही लेता है

कुछ तो बोलो अल्ला मौला

 

धरती की गोद मे लेटा वो ,आकाश ओढ वो सोता है

जो हर पल अपनी मेहनत से , हम सबको भोजन देता है

¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤

कवि सुनील समैया मो.8120384261

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.