#Kavita by Sunita Bishnolia

छलावा

जिसके पीछे दिनभर भागे,झूठ नाम है उसका,

जिए छलावे का जीवन,ना सच से काम है उसका।

 

लालच के चक्कर में पड़ वो,सुबह से शाम भटकता,

भंवरा सा मंडराता इत-उत,फिर हो बदनाम खटकता।

 

भूल भुलैया में फँस कर ,मूरख परिणाम भुगतता,

घर का ना रहे घाट का वो,झूठा राम नाम जो रटता।

 

बिना सोछे समझे जो बस ,हर काम किया करता  है,

जीवन में बिन पहचान रहे, ही गुमनाम जिया करता है।

 

हर काम में लाभ का सौदा ना कर,बुद्धि से ले काम,

जीवन में सब कुछ पा लेगा,कर मेहनत को प्रणाम।

 

#सुनीता बिश्नोलिया

#जयपुर (राजस्थान)

 

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