#Kavita By Sunita Bisnolia

अटल बिहारी…..(मेरी कविता का एक अंश)

नमन अटल..

अटल स्वप्न नयनों में लेके,मधुर कविता गाता

देश-प्रेम का जज्बा दिल में,मुख उसका बतलाता ।

 

निडर ऐसा लापरवाह ,अंजाम से ना घबराता

पथ के पत्थर को मार के ठोकर,आगे वो बढ़ जाता ।

 

निज भाषा के शब्दों को , विश्व मंच पे था बिखराया

विश्व-पटल पर खड़ा अटल वो,मेघ के सम था गरजा ।

 

पोकरण या कारगिल हो ,शक्ति सिंह सी दिखलाता।

दुश्मन को  लाचार बनाकर,नाकों चने चने चबवाता।

 

राजनीति का चतुर खिलाडी,शब्दों के तीर सुनहले,

खुद उलझन में फंसता पर,परहित हर द्वार थे खोले।

 

कथनी करनी एक सामान, आँखों में बस हिंदुस्तान,

अटल वचन वाला वो सिपाही,अटल बिहारी है महान।

 

अटल-फैसला,अटल-ह्रदय से, लेना तब मज़बूरी थी,

गद्दारों को सबक सिखाने , की पूरी तैयारी थी।

 

तैयार खड़े थे सीमा पर,तोपों की गर्जन थी भारी थी,

सबक सिखाया दुश्मन को,पाक को दी सीख करारी थी।

 

सुनीता बिश्नोलिया  – जयपुर

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