#Kavita by Surendra Agnihotri

दिल से दिल को आज
मिला लेंगे हम
प्रेम का दीप जलाएंगे हम
मन से मन का भेद मिटा लें
ऐसी दीवाली मनाएंगे हम
गर तेरे घर में रहे अंधियारा
तो घर मेरा रोशन हो गंवारा नहीं
क्या है मतलब मेरे सजने का
गर तुझे भी संवारा नहीं
खुशबू महके फिजाओं में
ऐसे फूलों को खिलाए हम…
किसी का दीप जले गम की आंसू तेल बने
किसी के दिल को दुखाना
नहीं ये खेल बने
खिल उठे चेहरे सभी के
गीत कोई गाए हम…

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