#Kavita by Surendra Kumar Arora

मन करता है प्रिये , तुम्हें

 

 

मन करता है प्रिये , तुम्हें

हर दिन गीत नया सुनाऊँ

गीत नए हों , स्वर नए हों

तुम्हें समर्पित उदगार नए हों

उदगारों को भाषा देकर

तुम पर अपना सर्वस्व लुटाऊँ

 

मन करता है प्रिये , तुम्हें

हर दिन गीत नया सुनाऊँ

 

फूलों से खुशबू ले लूं

तितली से लूं  इठलाना

नदिओं से शीतलता ले लूं

सागर से गहराना

झरनों से स्वर – लहरी ले लूं

वर्षा से इतराना

सबको अपने स्वर में पिरोकर

संगीत नया बनाऊँ |

 

मन करता है प्रिये , तुम्हें

हर दिन गीत नया सुनाऊँ.

 

तुम्हारे उर की सतत प्यास को

अधरों को अधरों पर रखकर , मैं बुझाऊँ.

मन करता है प्रिये , तुम्हें

हर दिन गीत नया  सुनाऊँ |

 

सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

 

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