#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance

गीत

*

तुम आये

महक उठा घर सारा

ठिठक गया आदिम अँधियारा

हो गया जग उजियारा।

 

अम्बर से तारे छिप छिपकर

निरख रहे हैं रूप

बर्फीले सन्नाटे में भी

चहक रही है धूप

सदियो से उलझा भटक था

पा गया एक सहारा।

 

श्वांस श्वांस सुरभित

मन हर्षित

रोम रोम पुलकित

तन उमगित

धरती से अम्बर तक बरसा

साथ नेह तुम्हारा।

 

स्वर्ण किरण सन्देश बांटती

आयी मेरे पास

पतझड़ में भी हुलस रहा है

आशा का मधुमास

तन में मन में घर आँगन में

घुल गया रंग तुम्हारा

महक उठा घर सारा।

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