#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance

कभी मन नही करता क्या?

 

कभी मन नही करता क्या

साथ बैठे कहीं भी

भागती हुयी भीड़ के रास्ते में

डाल दें बाहें

एक दूसरे के गले में

आँखे हों आँख में

और बातेँ करते रहें

भीड़ में खामोश

जैसे भीड़ छंटने के बाद की ख़ामोशी

और डूब जायें

एक दूसरे की आँख में

और उत्तर जाएं भीतर

और भीतर

जहां परमात्मा

अपनी रचनाओं की

खूबसूरत सी मूर्ति लिए

एकटक निहार रहे हों उसे ही

नितांत अकेले

हमारे आगमन की प्रतीक्षा में

लो चाहत थी दुनिया की

मिल लो परमात्मा से

एक से भले दो

और अब और भला परमात्मा।  –  सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस

 

 

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