#Kavita by Surendra Kumar Singh Chans

जितना दर्द,उतना सकून

जितनी बेचैनी,उतना चैन

जितनी उदासी,उतनी खुशहाली

जितना शोर  ,उतनी ख़ामोशी

जितनी रफ़्तार,उतना ठहराव

जितना प्रेम,उतनी नफरत

जितनी जलन,उतनी शीतलता

जितना अभाव,उतना भाव

जितनी दुरी,उतनी नजदीकी

सब तो है तुम्हारे चमन में

जो चाहे लेलो

कभी चाहो तो चाहने की तरह।

 

सुरेन्द्र कुमार सिंह चान्स

 

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