#Kavita by Surendra Kumar Singh Chans

कितना दिलचस्प है
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कितना दिलचस्प है यह सब
शब्दों के झुंड
आदमी की तरह जमे हुये थे
और अब परछाइयों की तरह
सरक रहे हैं वहाँ से
धीरे धीरे
और सँवर रहे हैं
नये नये रूप शब्दों में।
विश्वास ओर अविश्वास के बीच
झूलता हुआ मन
कोई दर्पण तो नही
होता तो भी
तस्वीरें तो उल्टी बनती है दर्पण में
बायां दायें हो जाता है
और दायाँ बाएँ
दिखते तो हम भी है दर्पण में उल्टे पुल्टे
पर लगते है हम हैं
और यह भी कम नही है कि
संकट है और दिखता है
संकट हरण की तरह
समस्या है और दिखती है
समाधान की तरह
चलो एक ख्वाब देखते है
अपनी ही मनुष्यता का।

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