#Kavita by Surendra Kumar Singh Chans

उड़ान
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मन उड़ान पर है
और शरीर ध्यान सा स्थिर है
मन की उड़ान पर।
दिलचस्प सफर है
देश बोल रहे हैं
देशों की राजधानियां चीख रही हैं
और मनुष्य ध्यान में है
महसूस कर रहा है
खामोशी की चैतन्यता
अनुभव का शब्द के लिए मचलना
सुन रहा है
आस्था का भौंकना
देख रहा है
नदी का रास्ता बन जाना
और ऐसे ही परिवेश में
एक दिलचस्प काया का
शरीर मे घुलना
और मंजिल का पास आना।

सुरेंद्र कुमार सिंह चांस

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