#Kavita by Surendra Kumar Singh Chans

गहरे घने सन्नाटे में
जाने क्या हुआ
सब बोलने लगे।
अंधेरा कहने लगा
कहो तो तुम्हे रौशनी तक ले चलूँ,
सन्नाटा कहने लगा
कहो तो एक गीत गुनगुनाऊँ,
गहराई कहने लगी
कहो तो आसमान में उदूँ,
हवा कहने लगी
महसूस करो
कितना अच्छा लग रहा है
आसमान कहने लगा
अरे ये तो
देश की राजधानी में
दिल की राजधानी है।

नया प्रेम है
हमारा तुमसे
करो न करो
बोलो तो
नया प्रेम।

सुरेंद्र कुमार सिंह चांस

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