#Kavita by Surendra Kumar Singh Chans

एक चेहरे में

हजारों चेहरे है

फिर भी अजीज है

हर चेहरा

हर चेहरा पर दिल

आ ही जाता है

हुआ यूँ कि

एक चेहरा आया दिल में

और दिल चेहरा हो गया

अपनों में अजनवी सा

और डूबा हुआ

एक एक चेहरे  में

जैसे समय गुजरता है

निहारते हुए

अपने आस पास का

मुकम्मल परिवेश

अंदर से बाहर तक

दिल चेहरा हो गया है भाई

बेपर्दा से

पर्दा कैसा।

 

सुरेन्द्र कुमार सिंह चान्स

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