#Kavita by Suresh Tiwari

हाँ हाँ मैं झूठ बोलियाँ…## 8 @सरसी छंद में ##  …

 

राम राज का हुआ धमाका, आँख गयी चुँधियाय….!!

बकरी के चौखट पर चीता, नतमस्तक हो जाय….!!

 

जब से खेल संघ के मुखिया , हुये सियासी घाघ…!!

तब से विजयी रहता भारत, बन दुनिया में बाघ..!!

 

हाँ – हाँ मैं झूठ बोलियाँ ….

 

गांधी और बुद्घ के वंशज,

लें गजनी अवतार…!

तब लगान के भुवन का जीना,

होता है दुश्वार…!!

 

सरकारों ने कर्ज बाँट कर,

किया अलौकिक काम…!

कृषक लगें बैकुंठ पँहुचने,

लेकर प्रभु का नाम….!!

 

हां हां मैं झूठ बोलियाँ…

 

देवालय आबू धाबी में,

अनुपम- पावन कृत्य…!

तम्बू में श्री राम बिराजें,

अहा ! मनोरम द्र्श्य..!!

 

हगडे ,बड्डे  ,मगडे ,लवडे ,,

रोज मनायें खूब…!

विलुप्त हुयी संस्कृतियों को,

आओ खोजें डूब…!!

 

हां हां मैं झूठ बोलियाँ..

 

झोलाछापों का सिस्टम में,

है अटूट इक रोल…!

सीमित साधन से करते ये,

आबादी कंट्रोल…!!

 

घर – घर में चैनल की जब से,

हुयी सुखद बरसात…!

बच्चे जल्दी जवाँ हो रहें,

बिन पानी बिन खाद…!!

 

हां हां मैं झूठ बोलियाँ…

 

सुरेश सैनिक…..!!!!!9236717074

 

 

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