#Kavita by Sushil Rakesh

कृष्ण पर निछावर हैं

————

 

स्मृतियां ही हैं जो अपने को साथ रखती हैं/मान मंदिर की चढाई/सांकरी गली से

जाते हुऐ/अगल- बगल घरों से आती राधे-राधे की आवाज

पेड़-पौधों से राधे-राधे का ऊभरता स्वर

दीदी जी की संस्कृत पाठशाला

पीले वस्त्र में सुसज्जित पाठशाला के बच्चे

सब स्मृतियों के पौध हो गयें है

मैं पहुंचा आकाश को छूती हुई मंदिर की चढाई

उसमें मिले श्री राधे के लाड़ले भक्त

महाराज जी ने बहुत दुलराया/छिड़कते प्यार में

घर का हाल जाना

और घर बेटियों में डूब गये

बड़े दुखी थे बेटियों के विभ्रम पर

बेटियाँ ही शाब्दिक खंजर से मारती

तो बहुत हृदय को कष्ट होता है

बस उनके आंसू नहीं ढरके /सब कह डाला

इस संसार की रीति को बखूबी समझा है

संसार से दूर हुए/पारलौकिक संसार में धंस

और सबकुछ छोड़ बरसाने में बस गये

स्मृतियों में ही खो गया मैं।

गहबर वन में देखा श्री माता जी की गौशाला

उन्होंने दो गोपियों को भेजा

यह गोपियां राधारानी की दिवानी हैं

आल्हादिनी हैं बरसाने वाली की

गायों का अंनत झुंड  देख

गुजरिस है श्री राधे कृष्ण से

अपना संसर्ग दें /उनके संसर्ग से

मुझे मुक्ति-भक्ति मिले

 

रास रंग में घुली मिली श्री राघा की नगरी

सब स्मृतियों में लहालोट

यहाँ आके तुम्हें सुकून मिलेगा

सब कुछ भूल गया कलरव संसार

जहाँ बसा पौधे पेड़ कमल के झुंड

बच्चों की पीतांबरी मगनता

स्मृतियाँ में  खो गया मैं

 

राधा संकीर्तन की जड़ है

सब गोपियां हैं एक परम पुरूष

रास मंडल में जागृत सचल विह्वल

बिन राधा के

सब राधे राधे कह  कृष्ण पर निछावर हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published.