#Kavita by Sushma Malik

“कलम V/S मलिक”

 

रो पड़ी कलम ओर बोली क्यों अपना दर्द मुझे बतलाती है।

 

आंसू से लथपथ लब्ज क्यो पगली मेरी धार से लिखवाती है।

 

अपने भी अब साथ नही अब कलम ही तो मेरा हमसाया है।

 

“मलिक” ने बता डाले हर दर्द यही तो अब दिल को भाया है।

 

कलम बोली लिख हिम्मत से क्यों दर्दों को तू यू सहती है।

 

पोछ डाल हर उस आंसू को जो तेरी आंख से बहती है।

 

आँसू भी तो दिए है अपनों ने इन्हें तू ही बता  छिपाऊँ कहाँ।

 

रास्ते सारे बन्द हुए सूझे ना कुछ भी “मलिक” जाऊ कहाँ।

 

अकेली आगे बढ़जा बावरी हर हिम्मत तुझे जुटानी होगी।

 

एहसान है किसी सहारे का वो पहचान तुझे मिटानी होगी।

 

सुन सारी बात कलम की, “सुषमा” ने बस दिल मे  ठानी है।

 

फट जाए चाहे पाँव कांटो से, अपनी राह तुझे बनानी है।।

 

सुषमा मलिक, रोहतक

महिला प्रदेशाध्यक्ष CLA हरियाणा

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