#Kavita by Sweety Goswami Bhargava

शिकायत और शिकायत

बीत गए है दिन कई लगता है

गुजर गए है जैसे बरसों

तन्हाई में उनकी मुलाक़ात आती है याद

जैसे मिले हों वो हमको

आज अभी या कल परसो

खिला खिला सा चेहरा उनका

थोड़े चेहरे पर गिरते उलझे बाल

उठती गिरती पलकें उनकी

करती थी खामोशी से कई सवाल

वो उनका चुपके हमको बाँहो में भर लेना

और एक पल में ही जन्मों का प्यार कर लेना

बदन की सरगोशियां और रूह की खामोशी

वो जब होते है साथ तो रहती है

होश को भी जैसे थोड़ी थोड़ी मदहोशी

उलझी उलझी बातें करके उनका

हमको उलझाना और सिर रखकर

अपनी गोद में दूर कंही दूर जन्नत की

सैर कराना

आज नही मिलते है जब उनको

हमको तन्हाई के पल तो हो रही है शिकायते

कैसे यकीन दिलाऊ उनको क़ि

मेरी साँसे पढ़ती है उनके नाम का कलमा

लिखी है मेरी रूह पर उनकी बस उनकी आयतें

माँगते है आज हम उस खुदा से

थोड़ा सा वक़्त मोहब्बत के लिए तुम्हारी कसम

मिल जाए कुछ वक़्त तो तेरी मेरी

सूनी राहों में एक बार फिर से मोहब्बत

मोहब्बत और मोहब्बत ही भर लूँ सनम

लगा दूँ तेरी हर शिकायत पर ताला

तेरी कसम तेरी कसम

स्वीटी गोस्वामी भार्गव

 

 

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