#Kavita by Sweety Goswami Bhargava

बदलाव

जिंदगी जब जरूरतों में ढल जाती है

लोगों को लगता है क़ि मोहब्बत बदल

जाती है

जिंदगी और जवानी हाथ में से

रेत की तरह फिसल जाती है

और लोगों को लगता है क़ि मोहब्बत

बदल जाती है

न मालुम होती है इश्क़ में कोई जिम्मेदारी

न ही कोई परेशानी

मगर सिर पर जिम्मेदारी की पगड़ी

जब बंध जाती है

तो लोगों को लगता है क़ि मोहब्बत बदल

जाती है

ऐसा नही है क़ि तुझसे आज इश्क कम

हो गया है मुझे

मगर क्या करुँ आज तू भी तो

मोहब्बत मेरी गैर का दामन थाम कर

मेरे सामने से निकल जाती है

और लोगों को लगता है क़ि मोहब्बत

बदल जाती है

जब देखा तुझको मैने अपनी वजह से

परेशान तो जान मेरी जान आज भी

निकल जाती है

और लोगो को लगता है क़ि

मोहब्बत बदल जाती है

ये रूप ये रंग इनका क्या ये तो

बदलाव है जीवन के

वो तो बस मोहब्बत ही है

जो ढलती उम्र के टाट में भी

पुरानी खूबसूरत यादों के मखमली

पैबन्द लगाती है

और फिर भी लोगों को लगता है क़ि

मोहब्बत बदल जाती है

मोहब्बत बदल जाती है

स्वीटी गोस्वामी भार्गव

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