#Kavita by Sweety Goswami Bhargava

दर्द ए दिल

सो जाता है जिस्म तो जब होती है

इसको थकावट

एक बिस्तर इस दिल का भी लगवाइए

बहुत कुछ है टूटा फूटा इसके अंदर

जरा जख्म इसके भी भरवाइये

ये दिल कभी टूटता है अपनों से

तो कभी बेगाने भी इसे

दुखाने चले आते है

भई सब अपने ही तो है

और आज के दौर में सब अपनापन

ऐसे ही तो निभाते है

इस दिल का क्या करे साहिब

जरा आप ही बताइये

मांग रहा है ये आराम ज़रा एक बिस्तर

इस दिल का भी लग्वाइए

स्वीटी गोस्वामी भार्गव

 

 

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