#Kavita by Sweety Goswami Bhargava

नही है ये विद्रोह

बहुत सोचा क़ि न लिखूँ मगर मेरी लेखनी ने

कसम खायी है जैसे कुछ विद्रोही स्वर उपजाने

की

कसम खायी है उसने जन समूह तक सत्य बात

पहुँचाने की

सूना है मैने बचपन से सत्ता को पाने के लिए

हर एक ने खेल खेला था

जरा कोई एक बताये का आज़ादी की लड़ाई

में देश सिर्फ एक भक्त अकेला था

बहुत है जिन्होने अपने सीने पर गोली खाई

बहुत है ऐसे जिनकी मौत पर लाखों हुई सुनी

कलाई

मात्र याद करने से कुछ नह होता हर सत्य को सामने लाना होगा

अगर आज़ादी मिली हमको तो हर एक के गुण

को गाना होगा

कटु है लेकिन सत्य यही है

जो सुना बस उस पर मत चलते जाओ एक

इतिहास अगर पड़ा हो तो और उसकी तह

तक जाओ

होगा खंडन मेरी बातों का होगा विद्रोह ये

है खबर मुझको मगर भेड़ चाल चलने से होना

है क्या क्योंकि

अब फिर से कोई सुभाष आज़ाद भगतसिंह को

देश को बचाने आना होगा

रुक जा कलम अब मत बोल कुछ और

इस अंध भक्ति की दौड़ में या तो तू झुक जा या

फिर तुझको अपना स्वर दबाना होगा

विरोध होगा मेरी बात का लेकिन क्या करुँ

किसी को तो खुल कर सामने आना होगा

किसी को तो खुल कर सामने आना होगा

स्वीटी गोस्वामी भार्गव

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