#Kavita by Sweety Goswami Bhargava

चल ना हमसफ़र

रोकते है तुझको भी और मुझको भी मोहब्बत से

चल न अब अपनी अलग दुनिया बसाते है

पूरी नही होती मोहब्बत इस ज़मी पर

फ़रिश्तों की

चल ना हमसफ़र खत्म करते है अपनी ये

बन्दिशों वाली जिंदगी

थाम ले मेरा हाथ पकड़ रखना मजबूत

हम तुम बन कर रूह अपनी मोहब्बत को

पूरी तरह से निभाते है

इस दुनिया के लोग लगाएंगे हमारी

पाक मोहब्बत पर नापाक इल्ज़ाम

इसलिए इस खुदा की नैमत पर

हम एक छोटी सी इल्तज़ा फरमाते है

चल ना हमसफ़र मेरे हम बनकर रूह

अपनी मोहब्बत को निभाते है

अपनी मोहब्बत को निभाते है

स्वीटी गोस्वामी भार्गव

 

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