#Kavita by Tej Vir Singh Tej

छंद आनन्द आहूति

गिरधारी छंद  ✏विधान – स न य स

तुम सौ नटवर को है जग में।
दधि लूट भगत रोकै मग में।।
घर जाय पकरि पीटै जसुदा।
हम ते मति उरिझौ श्याम सदा।।

दधि की मति कनुआ लूट करै।
पित-मातन सर क्यों पाप धरै।।
रसिया अब मति थामें बहिंया।
चख तेज सरस मेरौ दहिया।।

कपटी गिरधर ओ श्याम सखा।
अब लेहु शरन मो ओर लखा।।
मुरली मनहर तू आज बजा।
चल यामुन तट पै रास सजा।।

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