#Kavita by Tej Vir Singh Tej

जय जय श्रीराधे…..श्याम

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कुंजन निकुंजन में
खेल-खेल लुका-छिपी
समझे हो मन-मांहि
बड़े ही खिलार हौ।

धार कें उंगरिया पै
थारी बिन पैंदे वारी
करौ अभिमान बड़े
तीक्ष्ण हथियार हौ।

देखौ रण-कौशल हू
भागि भये रणछोर
अरे डरपोक कहा
भौंथरी ही धार हौ।

हमऊँ हैं ब्रजबासी
झांसे में यों नाय आवैं
तेज भले कितने हो
पर तुम गमार हौ।

 

खेल रह्यौ घात कर
जीत की न बात कर
घने देखे तेरे जैसे
कृष्ण-नंदराय जू।

तेरे हों खिरक भरे
कमी हमारेउ नाय
अनगिन बंधी द्वार
जाय देख गाय जू।

नित करै रुमठाई
हमपै सही न जाय
जाय जसुदा के ढिंग
दें सब सुनाय जू।

बसते न तेरी ठौर
न ही तेरौ दियौ खामें
तेज ऐसे लच्छन न
हमकूं सुहाय जू।

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