#kavita by Tejvir Singh Tej

मङ्गलाचरण में भगवान शिव स्तुति   –   दोधक/बन्धु/मधु छंद   –  शिल्प-भ भ भ+गु+गु

हे! अभयंकर हे! अविनाशी।
नाथ सनाथ करो दुःखनाशी।
को शिव शंकर तो सम दानी।
रावण लंक दई रजधानी।।

देव महा तुम हो नटराजा।
साधहु मोर करो शुभकाजा।
भूत गणादिक दास तुम्हारे।
नाग गले भव के भय हारे।।

राजत भाल सदा शशि गंगा।
प्रेतहि-भूत नचाय मलंगा।
वास करै शमशान सुखारी।
देह भभूत रमा त्रिपुरारी।।

भूतपती भगवान पिनाकी।
सामप्रिया कर कोर कृपा की।
भीम अनीश्वर रूद्र कपाली।
सुक्ष्मतनू पशुनाथ कमाली।।

स्थाणु हरी कवची मृगपाणी।
शाश्वत देव गिरीश कल्याणी।
शंकर सोम शिवा कृतिवासा।
नाथ हरो मम घोर पिपासा।।

हो अज नाथ सदा सुखकारी।
‘तेज’ तुम्हार कृपा अनघारी।।
देव सुदेव रहूँ पग-धूली।
तार दयाकर तारक शूली।।

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