#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

देख देश में आंखो से हिंसक प्राणी पलते हैं

पाकर हिंसा का प्रशिक्षण देश मे हिंसा करते हैं

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उन्हें हुकुमत दुध पिला अपने खातिर पाला है

है रिश्ता है ऐसा जैसे दोनो जीजा साला है

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वरना केशर वाली माटी पर सांप नहीं पैदा होता

वीरों के इस धरती पर आतंक नहीं पैदा होता

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सत्ता की लोलुपता में ईमान धर्म है बेच दिया

बिषदंतो के घुटने में अपना घुटना टेक दिया

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दशकों बाद फिर प्राची से सुरज भू पर आया है

दुर करेगा वो तम को ये विश्वास जगाया है

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आवाहन करता हूं मैं हिन्द के प्यारे वासी से

जो देश से द्रोह करे लटका दो उसको फांसी से

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