#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

साहित्य सार

——-

भूली भटकी मानवता का पथ प्रशस्त किया है

तिमिरांध जगत में जिसने नुतन प्रकाश दिया है

 

है साहित्य सार वही लिखा जन गन की पीड़ा को

राष्ट्र चेत्तना कर जागृत दुर किया हर पीड़ा को

 

अनीतियों पर किया वार  क्रांति बिगुल बजा डाला

चेत्तना शून्य पाषाण हृदय में भी ज्वाल उठा डाला

 

दशा और दिशा बदला दर्पण बन अक्स दिखाया है

सोए समाज को जगा दिया सदियों का दंभ मिटाया है

 

साहित्य कभी आंसु बनकर है गिरा कवि के मन से

कभी किया विद्रोह कलम स्याह में उठी अगन से

 

देश और धर्म के हित हे कवि मुक्त कलम कर

स्वच्छंद हो निर्भीक तुम सत् साहित्य मनन कर

 

साहित्य की ताकत ने तख्तो ताज बदल डाला

भारत हीं नहीं विश्व भर की रीति रिवाज बदल डाला

 

साहित्य की लॉ से हीं यह बची हूई मानवता है

जिसका सही साहित्य नहीं उसमें व्याप्त दानवता है

 

साहित्य हीं है जिसने मानव को दानव बना दिया

मार दिया मानवता को घर इंसान का जला दिया

 

साहित्य के दम पर हीं था विश्वगुरु भारत मेरा

संस्कृति हीं ऐसी थी जिस पर देवों ने डाला डेरा

 

सही साहित्य को पाकर हीं मेरा भारत महान बना

साहित्य गलत पाकर ही पाक बंग हैवान बना

 

साहित्य ही है जिससे इरान इराक बर्बाद हुआ

साहित्य ने ले डुबा बर्बाद बगदाद हुआ

 

साहित्य कहूं सच में तो सृष्टि का पोषक है

परिवर्तन का महामंत्र नवयुग का उदघोषक है

——

उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559521

Leave a Reply

Your email address will not be published.