#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

पाप ना तेरे कम होंगे

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रामचरित मानस दर्पण है पढो चरित श्री राम की

नित रुप निहारो इस दर्पण में राह चलो श्री राम की

 

रामचरित पढते हैं सब रावण चरित्र अपनाते हैं

चले न उनके आदर्शों पर शपथ राम की खाते हैं

 

पिता वचन को मान राम धन धाम त्याग दिए हैं

जग के मालिक जा वन में देखो किस हाल जीए हैं

 

भाई-भाई में प्रेम देख लखन साथ में जाते हैं

राम विरह में भाई भरत सुध अपना खो जाते हैं

 

तुम तो अपने भाई के दौलत पर नजर जमाए हो

मां बाप की खबर कहां सुबह शाम रुलाए हो

 

रामायन बस पढ लेने से कोई धर्म नहीं होगा

रामचरित्र को अपना लो जीवन सफल तभी होगा

 

राम ने जग का दुख बांटा तुम दर्द दिए फिरते हो

राम कर्म से पुज्य बने तुम नजरों से गिरते हो

 

चलो राम के पदचिन्हों पे तो रामायन पाठ करो

अगर नहीं तो धर्म ढोंग दोनो हीं ना साथ करो

 

पाप ना तेरे कम होंगे बस रामायन के रटने से

तुझे मुक्ति मिलेगी पगले राम के पथ पर चलने से

 

कहे उदय इस भ्रम जाल से निकलो राम शरण लेंगे

निर्मल मन सत्कर्म करो तो हीं मनचाहा वर देंगे

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उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

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