#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

हे माली वो पेड़ लगा जिस छांव में हम मिल साथ रहे

बैठ  परिंदे  हिल मिल  गाए  ऋतु बसंत  मधुमास रहे

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कोयल की  मीठी  तानें हों भंवरे की मधुर मुस्काने हों

होठों पे  गीत  सुहाने  हो  हम  बस प्रेमी मस्ताने हो

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हे माली वो फुल खिला  जिसकी सुगंध बरमास रहे

बैठ  परिंदे  हिल मिल  गाए  ऋतु बसंत  मधुमास रहे

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देख जरा ये वन उपवन बिन खिले फुल हीं उजरी है

देख  बसंती  मौसम  में  ये  बागबान  क्यूं  बिखरी है

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हे  माली  इसे  सजा  ऐसे  ये नंदन वन सी सजी रहे

बैठ  परिंदे  हिल मिल  गाए  ऋतु  बसंत मघुमास रहे

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वो फुल खिला इस बगिया में सारा जग सुरभित हो जाए

वो छांव मिले वन उपवन में जो छांव पथिक को मिल जाए

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कांटो को काट उखाड़ फेक मधुबन में खुशी अपार रहे

बैठ परिंदे हिल मिल गाए ऋतु बसंत मधुमास रहे

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उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

७७३८५५९४२१

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