#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

पूछ रहा हूं मैं बगिया के इस गुलशन के माली से

लिए हाथ खू़नी खंजर कातिल बैठा हर डाली पे

कौन बचाएगा गुलशन के रंग बिरंगे फूलों को

सींचेगा इस मधूबन को काटेगा चूभती शूलों को

ये बगिया भारत मां की बेेटों की अमिट निशानी है

राणा शिवा गुरु भगत शेखर की अमर कहानी है

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भारत माता के खातिर फांसी का फंदा चुम लिया

मौत को अपने गले लगाकर पथ क्रांति का चून लिया

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शोणित से सींचा जिसको भारत का ऊंचा नाम किया

अमर शहीदों ने अपना हंस-हंस कर जीवन दान दिया

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उस भारत माता की जय कहने पर शोर मचाते हैं

सड़क से लेकर संसद तक शैतान आज चिल्लाते हैं

वंदेमातरम शब्द नहीं भारतमाता का वंदन है

राष्ट्रपुरुष हीं गा सकता यह अमर गीत अभिनंदन है

पुजा के इस मंदिर से कैसी गंदी दुर्गंधें आती है

सिसक रही तेरी भारत मां फिर से आज बुलाती है

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राष्ट्रधर्म के बीच कभी मजहब को ना आने देना

हे भारत के अग्रदूत स्वाभिमान नहीं जाने देना

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