#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

बेटी

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कभी सीता कभी दुर्गा कभी काली भवानी है

नहीं कमजोर है बेटी ये झांसी की रानी है

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कुलों को तारती बेटी बचाती मान मर्यादा

हकीकत में वो बेटों से रखती ध्यान है ज्यादा

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पराई है नहीं बेटी ! है ये लक्षमी घर की

बड़े सौभाग्य से मिलती हमें वरदान ईश्वर की

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माँ बहन बहुऐं सभी तो बेटियां हीं हैं

देश और धर्म पर मरती बेटियां भी हैं

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सदी इक्सीसवीं तो बेटियों से हीं विभूषित है

बेटियां आंगन में तुलसी जैसी हीं पुजित है

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हमारी आन है बेटी हमारी शान है बेटी

अभिमान है बेटी स्वाभिमान है बेटी

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कभी जौहर में जलती थी घरों में आज जलती है

दहेजों के चिताओ पर दिन रात जलती है

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अब तो कोख में हीं मारते हैं लोग बेटियां

बेटों के लिए पर खोजते हैं रोज बेटियां

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लगता है इस समाज को शाप लग गया

सीता की परीक्षा का है पाप लग गया

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बेटी हीं प्रकृति का दुसरा स्वरुप है

मत मार बेटियों को उसमें तेरा रुप है

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उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

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