#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

जवानो को नमन

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जवानो है नमन तुझको

किए रौशन दिशाओं को

उजाला देश में गर है तो !

तो है तेरी चिताओं से

 

रहे बैठे घरों में शान से

हम जम्हाईयां लेकर

रहे लड़ते तू दुश्मन से

जवानो जान दे दे देकर

 

बम बारुद से खेले हो तुम

दिन रात सरहद पर

कंटीले राह बर्फीले

तपती रेत पर्वत पर

 

अमन की आस में शोणित

बहाए लाल है धरती

अमर जवान ज्योति से

मेरी उजियार है बस्ती

 

जो गोली चली मुझ पर

क्लेजे पर उसे रोका

दिए जो चोट दूश्मन ने

उसे हँस हँसके है रोका

 

वतन के आन के खातिर

वतन के शान के खातिर

बहाए हैं लहू तुमने

हिंदुस्तान के खातिर

 

शहादत पर तुम्हारे हम

तो क्या आसमान रोया है

जमीं रोयी विलखकर

और श्मशान रोया है

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उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

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