#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

गांव ने भी रुप बदला अब कहाँ वो गांव है

रंग रुप चाल बदले ना रहा वो छांव है

 

मस्त हैं अपने सब अपने में सब मशगूल हैं

देखता हूँ हर कली मुरझाए सारे फूल हैं

 

रौनके होली दिवाली की भी अब रहती नहीं

प्यार वाली रंग अब चेहरों पे है सजती नहीं

 

अपने-अपने में फंसे हैं अपनी-अपनी राग है

है हंसी होठों पे लेकीन मन में गहरी दाग है

 

लोग जो अब टांग औरो के यहाँ खीचने लगे

ना रही बातें वो प्यारी ईमान भी बिकने लगे

 

धर्म कर्म की किताबें कौन अब पढ़ता यहाँ

उठते हीं लोग अब अखबार जो पढ़ते यहाँ

 

आने वाली फस्ल संग नस्लें भी हैं बिगर गई

गांव की चौपाल ना जाने कहां किधर गई

 

आदमी जो गांव के सीधे थे काबिल हो गए

गांव वाले ना कहो शहरों में शामिल हो गए

——

उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

84 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.