#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

है वक्त अभी भी जाग जरा अपनी कायरता छोड़ो

हिंदु हिंद हिंदुत्व पे जो भी हाथ उठे उसको तोड़ो

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जो एक ईंट मारे तुमको सौ पत्थर उसको मारो

जो हिंद से घात करे अफजल सा सीना फाड़ो

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वरना तुमको भी काश्मीर की तरह मिटा डालेंगे

केरल और बंगाल सरीखे आग लगा डालेंगे

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पाठ अहिंसा का मत पढ आजाद भगत की राह चलो

जहर जमीं पर जो बोए उन बिषदंतों को काट चलो

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मौन गुलामी से निकलो वरना अनर्थ हो जाएगा

राणा-शिवा की माटी पर फिर बिषधर फन फैलाएगा

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हर हिंदु के घर में अब सात आठ संताने हो

दुनियां में मेरे भारत की अपनी अलग पहचाने हों

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भारत को टुकड़े करने पर ये दुष्ट हुए आमादा हैं

तुम कायर सा देख रहे वो तोड़ रहे मर्यादा हैं

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निर्दोष मासुमों का नित घरवार जलता है

आज तिरंगा है घायल घर में दुश्मन पलता है

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हिंदु जाए अमरनाथ तो टैक्स लगाया जाता है

आस्तीन के सांपो पर धन खूब लुटाया जाता है

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एक देश में अलग-अलग कोई बता कानुन है क्यों

दिल्ली बेबस दिखती है इतने पर भी मौन है क्यों

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तुम इसी तरह खामोश रहे ये कुत्ते बोटी नोचेंगे

काश्मीर की तरह देश के गली गली में भौकेंगे

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गीता रामायन के बदले तुमको कुरान पढना होगा

हिंदु होश में ना आया तो अस्लाम कहना होगा

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वो जब चाहे तब सड़कों पर लेकर जुलुस उतरते हैं

हिंदु के त्योहारों पर पत्थर ले जिन्न उतरते हैं

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क्योंकी तुमने स्वाभिमान अपना है गिरवी दे डाला

भूल शिवा की तलवारे भूले हो राणा का भाला

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उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

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