#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

शस्य श्यामला चूनरी ओढ़ प्रकृति भी हरषाई है

धरा गगन सब आह्लादित नववर्ष हमारी आई है

 

झूम उठी डाली-डाली कोयल की मीठी तानों से

मस्त पवन ले हिचकोले सुन भँवरों की गानो से

 

फूलों कलियों से सज्जित वन उपवन अमराई है

धरा गगन सब आह्लादित नववर्ष हमारी आई है

 

फागुन की मोहक मस्ती अपने हीं रंग बिखेरे हैं

अद्भुत छटा है प्रकृति की अन्नपुर्णा डाले डेरे हैं

 

नूतन मन नूतन जग जन नव नूतन तरुणाई है

धरा गगन सब आह्लादित नववर्ष हमारी आई है

 

घर-घर में आई खुशहाली खेतों में हरीयाली है

सजी है दुल्हन सी धरती मौसम भी मतवाली है

 

चैत्रमास की मनमोहक क्या हवा उठी पुरवाई है

धरा गगन सब आह्लादित नववर्ष हमारी आई है

 

कोयल की प्यारी स्वर लहरी आमों के फूलों की महकें

हंसिए का हरहर खरखर कृषकों के मौजों की चहकें

 

ये आर्यावर्त का उत्सव है घर घर बजती शहनाई है

धरा गगन सब आह्लादित नववर्ष हमारी आई है

 

यह अलौकिक दृश्य देख तब देव धरा पर आते हैं

आनंदित  धरती  अंबर  हम  नववर्ष  मनाते  हैं

 

 

चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि हर्षोल्लास ले आई है

धरा गगन सब आह्लादित नववर्ष हमारी आई है

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उदय शंकर चौधरी नादान

कोलहंटा पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

 

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