#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

समाजवाद का सच

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आज कलम में स्याह नहीं भरदी बारुदी गोली है

समाजवाद का सच क्या है कलम हमारी बोली है

 

समाजवाद की नारों में परिवारवाद पलते देखा

समाजवाद के चिंगारी में हीं समाज जलते देखा

 

चोर लूटेरे दुष्कर्मों की रिश्वतखोरों हत्यारों की

समाजवाद के नाम सिर्फ हुई राज मक्कारों की

 

लोकतंत्र की फाँसी दे दी सत्ता के ठेकेदारों ने

लोहिया जेपी की त्याग भूला लूटा खूब गद्दारों ने

 

जातिवाद मंदिर मस्जिद आरक्षण के आग लगाएे हैं

आग लगाने वाले हीं फिर आग बूझाने आए हैं

 

जनता भूखी रही देश में नित-नित हुए घोटाले हैं

व्हिस्की चिकन चली उनके घर जनता के मूँह ताले हैं

 

समाजवाद का है सच यह की हर तीसरा आरोपी है

भोली-भाली समाज के पीठ में चाकू घोंपी है

 

जब भी कोई राष्ट्रभक्त जनहित में पाँव बढ़ाता है

सत्तालोलुप हो एक जुट नित नए स्वांग रचाता है

 

सामुहिक सिद्घांतों की बस सभी दुहाई देते हैं

जेपी लोहिया के आदर्शों को बलि चढ़ाई देते हैं

 

जिस दिन अपनी मेहनत की रोटी से भूख मिट जाएगी

उस दिन समाजवाद की भाषा समझ में आएगी

 

अभी कलम में स्याह बची है खून रगों में बाकी है

हमने थोड़ी समाजवाद की तुम्हें दिखाए झाँकी हैं

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उदय शंकर चौधरी नादान

कोलहंटा पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

 

 

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