#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

काश्मीरियत के वादे
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सत्ताधीशों आंखें खोलो काश्मीर का ध्यान धरो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो।।

आजादी के साल इकहत्तर बीत गए तुम सोए हो।
काश्मीर नित धधक रही तुम सत्ता मद में खोए हो।।

आरोप प्रत्यारोप के खेल घिनौने खेल लिए।
रोज शहीद होते जवान हमले पर हमले झेल लिए।।

शर्म करो सत्ता वालो निज शक्ति का आह्वान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

कहाँ गए काश्मीरी पंडित उनका ध्यान नहीं आया।
करुण कराह काश्मीर का बहरों सुन नहीं पाया।।

घाटी रोज दहलती है नित आतंकी अंगारों सै।
देश त्राहि त्राहि करता है घर बैठे गद्दारों से।।

लालबहादुर, इंदिरा गाँधी, अटल समान संधान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

सरकारें आयी और गई लेकिन हालात नहीं बदले।
काश्मीर के आंगन में दिन और रात नहीं बदले।।

काश्मीरियत के वादे तुम इतनी जल्दी भूल गए।
गद्दारों से हाथ मिला कर तुम भी शायद फुल गए।।

हो जाने दे आर पार देरी क्यों है एलान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

राष्ट्रवाद का बिगुल बजाकर तुम सत्ता में आए थे।
गौ, गीता, गंगा की सारेआम शपथ तू खाए थे।।

अमरनाथ, वैष्णव देवी के भक्त डरे क्यों रहते हैं।
कायर दिल्ली बन बैठी हम चोट हजारों सहते हैं।

अग्नि पृथ्वी ब्रह्मोस निकालो सरहद पर प्रस्थान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

भारत की माटी पर पाकिस्तानी नारे लगते हैं।
देशदद्रोहियो के हाथों रोज तिरंगे जलते हैँ।।

जो पत्थर मारे सेना को सूली पर उसको लटकादो।
फन कुचलो बिषदंतो का अमर तिरंगा लहरादो।।

जो पहरेदार हैं भारत का उनका भी तो सम्मान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

अनुच्छेद तीन सौ सत्तर धारा एक विनाशक है।
राष्ट्रद्रोह का परिचायक देशहित में घातक है।।

खामोश क्यों बैठे हो सवा अरब की ताकत है।
देश तुमसे पुछ रहा बतलाओ कैसा नाटक है।।

जिन्ना के जिन्हौं से अपनी मुक्त ये हिंदुस्तान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

जेलों में आदमखोरौं की मेहमान नबाजी बंद करो।
मत पालो शैतानों को सीधा सांसे बंद करो।

कायरता का चोला बदलो सिंहनाद करवा डालो।
जयचंद जाफरों का नाम निशान मिटा डालो।।

राष्टट्रप्रेमियो के चेहरों पर दिल्ली अब मुस्कान भरो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

भारत की आजादी अब भी मुझे अधूरी लगती है।
भ्रष्टाचारी रिश्वतखोरी की सिर्फ दुकानें चलती है।।

नेता अफसर सरकारी बाबु अपना रौब दिखातें हैं।
लूट गरीबों की रोटी माल गरीब का खाते हैं।।

नंगा करो लूटेरों को उसकी बंद दुकान करो।
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।

ये देश है राणा, सांगा का हम शिवा समान मतवाले हैं।
गुरुगोविंद, पृथ्वीराज सा सर्वस्व लूटाने वाले हैं।।

हारारानी, पन्नाधाय मर्दानी झांसी की रानी।
आजाद, भगत, बिस्मिल, पटेल हर बच्चा है हिंदुस्तानी।।

शपथ तुम्हें इस माटी की जागो जनकल्याण करो
दर्द हरो इस माटी का भारत नवनिर्माण करो ।।
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उदय शंकर चौधरी नादान
कोलहंटा पटोरी दरभंगा
7738559421

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