#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

हिंदी दिवस
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हमारी आन है हिंदी, स्वाभिमान है हिंदी।
ह्रदय माँ भारती की है, हिंदुस्तान है हिंदी।

दिलों को जोड़ती है, प्रेम रस घोलती है।
है हिंदी प्यार की भाषा, दुनिया बोलती है।

तुलसी की रामायण, मधूर मुस्कान है हिंदी।
हमारी आन है हिंदी, स्वाभिमान है हिंदी।

कबीर और सूर की है ये, मीठी मधुर वाणी।
जायसी की पद्मावत, मुंशी जी की कहानी।

पीर दुष्यंत की तो, कहीँ रसखान है हिंदी।
हमारी आन है हिंदी, स्वाभिमान है हिंदी।

रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, परशुराम की प्रतिज्ञा।
निराला, पंत, दिनकर की होवे न अवज्ञा।

राष्ट्रीय एकता हिंदी है, हिंदुस्तान है हिंदी ।
हमारी आन है हिंदी, स्वाभिमान है हिंदी।

क्रांति ज्वाल है हिंदी, हिमालय भाल है हिंदी।
अटल उद्धोस है जग में, काल कपाल है हिंदी

महादेवी, सुभद्रा जी की अरमान है है हिंदी।
हमारी आन है हिंदी, स्वाभिमान है हिंदी।

क्रांति का ‘उदय’ है ये भाषा अभय है ये।
सरल कविता कहानी में, जय विजय है ये।

आज भी सारे कवियों की जान है हिंदी।
हमारी आन है हिंदी, स्वाभिमान है हिंदी।
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उदय शंकर चौधरी नादान
कोलहंटा पटोरी दरभंगा
7738559421

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