#Kavita by Uday Shankar Chaudhari

मंजिल उतनी सुंदर होगी जितना संघर्ष कठिन होगा
—–
चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा।
मंजिल उतनी सुंदर होगी,
जितना संघर्ष कठिन होगा।

शाम न होगा रात न होगी,
सोचो दिन कैसा होगा।
शाम हुई है रात ढ़लेगी,
सुर्य उगेगा दिन होगा ।

चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा ।
मंजिल जितनी सुंदर होगी,
उतना संघर्ष कठिन होगा।

बुरे वक्त में क्या घबराना,
रुको नहीं चलते रहना।
इस पल को वनवास समझ,
है विश्वास सुदिन होगा।

चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा ।
मंजिल उतनी सुंदर होगी,
जितना संघर्ष कठिन होगा ।

बड़े लक्ष्य के लिए सदा,
संघर्ष बड़े करने होते।
जितनी जलती स्वर्ण आग में,
उतना ही कुंदन होगा।

चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा ।
मंजिल उतनी सुंदर होगी,
जितना संघर्ष कठिन होगा।

चोट शिला का जितना सहती ,
मेंहदी उतनी सजती है।
होना तो है पतझड़ पहले ,
बाद बंसंती दिन होगा।

चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा ।
मंजिल उतनी सुंदर होगी
जितना संघर्ष कठिन होगा ।

मंजिल की परवाह करो ना,
तुम मंजिल के पार चलो।
ठहर न जाना मंजिल पाकर,
लक्ष्य तेरा उऋण होगा।

चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा ।
मंजिल उतनी सुंदर होगी,
जितना संघर्ष कठिन होगा ।

जीवन है संघर्ष अटल ये,
सुख दुख पाँव तुम्हारे हैं।
दुख में धैर्य नहीं खोना,
सारा दर्द मलिन होगा।

चलो कंटकों में हँस हँस कर,
कल फिर सुंदर दिन होगा ।
मंजिल उतनी सुंदर होगी,
जितना संघर्ष कठिन होगा ।

ऊँचे उत्तुंग को चलो लाँघ ,
बाधाओं से टकराओ।
दिग्भ्रमित न हो पथ में राही,
ये अधकार मलिन होगा।
—–
उदय शंकर चौधरी नादान
कोलहंटा पटोरी दरभंगा
7738559421

Leave a Reply

Your email address will not be published.