#Kavita by Uday Shankar Chaudhary

परशुराम तुम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

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परशुराम तुम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

वीर धीर निर्भीक सुतों की मातृभूमि हो

तुम अखिल विश्व की गुरु महान

तुम दिए विश्व को अमर ज्ञान

हो स्वर्ग तुम्हीं इस धरती पर

जीवंत रुप में परम धाम

देव मनुज ऋषि मुनियों की मातृभूमि हो

परशुराम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

तुम हो वेदों की ऋचा मधुर

तुझमें गीता का अमर सुर

मानवता की अमर गीत

तुम गीत मधुर संगीत मधुर

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रण में गीता गाते वीरों की मातृभूमि हो

परशुराम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

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हे मातृभूमि भाल तेरे नगपति हैं

हे मातृभूमि ढाल तेरे नगपति हैं

बहती गंगा कल-कल छल-छल आंचल से

करते जय जयकार तेरे नगपति हैं

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मैं धन्य हुआ तुम मेरी मातृभूमि हो

परशुराम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

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सुर्य चंद्र करते सब तेरा जय है

शंकर का तुझको वरदान अभय है

हंसती धरती हंसता नीला अम्बर है

दशो दिशाओ में तेरा जय-जय है

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पवित्रता से परिपुर्ण सौन्दर्यभूमि हो

परशुराम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

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हम पले बढे तेरे रज में

है और नहीं तुझसा जग में

हर बार तुम्हारा नेह मिले

जब भीं आऊं मैं इस जग में

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सौभाग्य हमारा नमन हमारी मातृभूमि हो

परशुराम राम कृष्ण की मातृभूमि हो

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