#Kavita by Uday Shankar Chaudhri

हम भी नहीं रहेंगे तुमको भी है जाना

इस जिंदगी का प्यारे है नहीं ठिकाना

 

कसमें हजार दे दो वादे हजार करलो

जाना तुझे है इक दिन एतवार करलो

 

तेरा नहीं चलेगा तब कोई भी बहाना

इस जिंदगी का प्यारे है नहीं ठिकाना

 

अंजान ये शहर है कोई नहीं है अपना

सब मोह पाश हैं ये जैसे कोई सपना

 

मतलब के हैं नाते मतलब का जमाना

इस जिंदगी का प्यारे है नहीं ठिकाना

 

माटी के सारे पूतले टुटेंगे सब यहीं पर

मिट्टी के सब बने हैं छुटेंगे इस जमीं पर

 

माटी के हैं खिलौने माटी में मिल जाना

इस जिंदगी का प्यारे है नहीं ठिकाना

 

घरवाले तेरे अपने घर से निकाल देंगे

कुछ ना तन पे होगा कपड़े उतार लेंगे

 

न जाएगी ये दौलत ये माल ये खजाना

इस जिंदगी का प्यारे है नहीं ठिकाना

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उदय शंकर चौधरी नादान

कोलहंटा पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

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