#Kavita by Uma Mehata Triavedi

वक्त…

उमा मेहता त्रिवेदी की कलम से….

 

ऐ वक्त..

ठहर तो जा..

बहुत कुछ कहना

सुनना और सुनाना है..।

क्यूँ.. ना

ज़मी पर रहकर

पंख राह इन्हें बनाकर

कदमों से उड़ान भरती हूँ..

 

ऐ वक्त..

ठहर तो जा..

बनूँ ना सितारा

बस बन के यूँहीं

तेरा-हीं नूर बनूँ

स्वरा हूँ..

पंरिदा भी..

आहट तो हूँ

परछाई भी..

पर अरमान तेरा बनूँ

किस्सा तेरा एक हिस्सा बनूँ

एहसास हर पल करूँ

 

ऐ वक्त..

ठहर तो जा

वफा दर वफा करेंगे

बरसों से बिछड़कर

मिलते-जुलते रहेंगे

नमक से नमकीन ये नीर

सागर,नदियाँ,समुद्र कहूँ

पलकों में बसालूँ

नजरों से दूर

अब तू ही बता

तुम बिन कैसे रहूँ..।

 

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