#Kavita by Vandana Rshmi Tiwari

जय जगदंबा

व्याप्त चराचर अलख निरंजनि
आदिशक्ति हे मात भवानी

आयी शरण तुम्हारी मैया
शुभदा वर दो माँ वरदानी

भक्त वत्सला मातु शुभांगी
सकल सृष्टि की हो महतारी

रश्मि आश की लिए हूं दाती
साँसों में है नाम तेरा

खड़ी लिए उम्मीद मेरी
बिगड़ी है बनाना काम तेरा

माँ के बिना असम्भव जीना
में सन्तान तुम्हारी हूँ
अभगा को सुभगा कर दो
माँ किस्मत की मारी हूँ

वन्दना रश्मि तिवारी
इटावा उत्तर प्रदेश

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